ब्रूनो की घर वापसी, जब पूरा मोहल्ला एक हो गया

Ravi
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Lost Pet Dog Found Hindi Story: शहर की एक शांत कॉलोनी में रहता था मिश्रा परिवार। उनका घर छोटा सा था, दो कमरे, एक किचन और सामने एक छोटा लॉन। लेकिन उस घर में प्यार की कोई कमी नहीं थी। राजेश मिश्रा जो घर के मुखिया थे, वे एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट की जॉब करते थे। वे हर सुबह सात बजे निकलते और शाम सात बजे तक लौटते। थके हुए आते थे, लेकिन बच्चों को देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती। सरिता, राजेश मिश्रा जी की पत्नी, उनका काम घर संभालना था, आस-पास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ातीं। उनकी हंसी घर में गूंजती रहती।

बड़ा बेटा अर्जुन दसवीं क्लास में पढ़ता था। क्रिकेट का दीवाना, और मोहल्ले की टीम का कप्तान भी वही था। थोड़ा शरारती था, लेकिन दिल का बहुत अच्छा। स्कूल से लौटते ही बैग फेंकता और बॉल उठाकर खेलने निकल जाता। घर में सबसे छोटी थी सिया – सिर्फ सात साल की। गुलाबी फ्रॉक पहनने की शौकीन थी, हर बात पर हंसने वाली, और छोटी-छोटी बातों पर आंसू निकाल लेने वाली। उसकी मासूमियत पूरे घर को रोशन रखती थी।

और परिवार का सबसे प्यारा सदस्य था ब्रूनो। दो साल का गोल्डन रिट्रीवर। सुनहरे बाल, चमकती आँखें, और पूंछ जो कभी रुकती ही नहीं। ब्रूनो सिर्फ कुत्ता नहीं था, वो परिवार का हिस्सा था। सुबह अर्जुन को बस स्टॉप तक छोड़ने जाता। सिया के साथ पूरे घर में दौड़ता। शाम को जब राजेश दरवाजा खोलते, ब्रूनो सबसे पहले उनकी ब्रीफकेस सूंघता और पूंछ हिलाता। रात को सिया के बिस्तर के पास ही सोता, जैसे की वो अपनी छोटी बहन की रक्षा कर रहा हो। ब्रूनो के बिना घर अधूरा सा लगता।

वो दिन जब सब बदल गया।

दिवाली के ठीक दो दिन बाद की बात है। नवंबर की हल्की ठंड शुरू हो चुकी थी। सुबह की धूप अच्छी लग रही थी। सिया उठते ही ब्रूनो के पास गई। ब्रूनो की पूंछ हिल रही थी। सिया बोली, मम्मी, आज ब्रूनो को नहलाएंगे ना? दिवाली में पटाखों की धूल से गंदा हो गया है।

सरिता किचन में चाय बना रही थीं। मुस्कुराकर बोलीं, हाँ बेटा, नाश्ता कर लो पहले। नाश्ते में पराठा और दही था। सबने साथ बैठकर खाया। ब्रूनो टेबल के नीचे बैठा था, उम्मीद भरी नजरों से सबको देख रहा था। सिया ने उसे एक टुकड़ा पराठा खिला दिया।नाश्ते के बाद सिया और अर्जुन ब्रूनो को लेकर घर के सामने लॉन में आए। सिया ने ब्रूनो का कॉलर पकड़ा और बोली, आज तुम बहुत सुंदर लगोगे। तभी पड़ोस की रिया साइकिल पर आई। रिया सिया की अच्छी दोस्त थी। वो बोली, सिया, चल पार्क चलें? ब्रूनो को भी घुमा लाएंगे।

सिया ने मम्मी से पूछा। सरिता ने बाहर झांककर देखा और बोलीं, हाँ जा बेटा, लेकिन एक घंटे में लौट आना। अर्जुन भी साथ चला गया। तीनों पार्क की तरफ निकल पड़े। पार्क कॉलोनी से दो गलियाँ पार करके था। रास्ते में ब्रूनो खुशी से दौड़ रहा था। कभी सिया के पास आता, कभी अर्जुन के। और आदत के अनुसार उसकी पूंछ तेजी से हिल रही थी।

पार्क पहुंचकर अर्जुन ने ब्रूनो का कॉलर खोल दिया। यहाँ सुरक्षित है भाई, दौड़ ले। ब्रूनो खुशी से भागा। बच्चे झूले पर खेलने लगे। सिया झूला झूल रही थी, अर्जुन रिया के साथ स्लाइड पर। आधा घंटा बीत गया। पूरा हंसी-खुशी का माहौल था।

अचानक सिया ने पूछा, भैया, ब्रूनो कहाँ है? अर्जुन ने इधर-उधर देखा। ब्रूनो कहीं नहीं दिख रहा था। दोनों चिल्लाने लगे, ब्रूनो! ब्रूनो! पार्क में कुछ और बच्चे खेल रहे थे। कुछ आंटी जी मॉर्निंग वॉक कर रही थीं। सबने मदद की। कोई इधर देखा, कोई उधर। लेकिन ब्रूनो नहीं मिला।

सिया की आँखें भर आई। घर लौटते वक्त वो चुप थी। घर पहुंचते ही दरवाजा खोला और फूट-फूट कर रोने लगी। मम्मी… ब्रूनो खो गया… सरिता ने उसे गोद में लिया। खुद का दिल धक् से रह गया। अर्जुन चुपचाप कोने में खड़ा था। उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था। आखिर कॉलर क्यों खोला?

तस्वीर सांकेतिक- image source canva.

शाम का घर का गमगीन मौहल।

राजेश शाम को घर लौटे। दरवाजा खोलते ही माहौल भारी लगा। सिया अभी भी रो रही थी। ब्रूनो का खाली बाउल पड़ा था। उसकी प्यारी गेंद कोने में। राजेश ने बैग रखा और सबको पास बुलाया। क्या हुआ? सरिता ने सारी बात बताई।

राजेश ने सिया को गोद में लिया। चिंता मत करो बेटा, मिल जाएगा। हम सब मिलकर ढूंढेंगे। लेकिन रात का खाना किसी ने ठीक से नहीं खाया। सिया ने दो निवाले खाए और बोली, मुझे भूख नहीं है। ब्रूनो के बिना बिस्तर पर नहीं सोई। वो दरवाजे के पास ही कंबल लेकर लेट गई। जैसे ब्रूनो आएगा और वो सबसे पहले देखेगी।

अर्जुन अपने कमरे में था। उसे नींद नहीं आ रही थी। वो बार-बार सोच रहा था – अगर कॉलर नहीं खोला होता… अगर पार्क के गेट की तरफ नहीं गया होता… सरिता उसके पास आई और बोलीं, बेटा, गलती हो जाती है। कल सुबह हम सब मिलाकर ढूंढेंगे।

ब्रूनो की जब तलाश शुरू हुई।

अगली सुबह राजेश ने ऑफिस फोन करके छुट्टी ले ली। सरिता ने ट्यूशन कैंसल कर दी। अर्जुन स्कूल नहीं गया। पूरा परिवार तैयार हुआ। सबसे पहले पार्क गए। हर कोने में देखा। झाड़ियों में, बेंच के नीचे। पार्क के गार्ड अंकल मिले। उन्होंने कहा, कल एक सुनहरा कुत्ता इधर था, लेकिन गेट की तरफ भागा।

सबका दिल धक् से रह गया। बाहर सड़क पर? वे कॉलोनी की हर गली में घूमे। राजेश ने ब्रूनो की फोटो मोबाइल से प्रिंट करवाई और हर दुकान, हर दीवार पर चिपकाई। लिखा था – खोया हुआ कुत्ता ब्रूनो। अगर देखें तो संपर्क करें। इनाम दिया जाएगा।सिया हर पोस्टर के सामने खड़ी हो जाती। उसकी छोटी आवाज गलियों में गूंजती – ब्रूनो… आ जा… मैं तुझे बिस्किट दूंगी… उसकी आँखें लाल हो रखी थीं, लेकिन फिर भी वो हार नहीं मान रही थी।

पड़ोसियों ने की मदद।

रास्ते में कई पड़ोसी मिले। शर्मा अंकल अखबार पढ़ रहे थे। बोले, अरे राजेश जी सुना ब्रूनो खो गया है। चिंता मत करो। मैं अपने लड़के को बोलता हूँ, वो भी साथ में मिलाकर ढूंढेगा। गुप्ता आंटी चाय का कप लेकर आई। पी लो, थक गए होगे। मेरा टॉमी भी एक बार तीन दिन खोया था, खुद घर लौट आया।

सिया ने आंटी की गोद में सिर रख दिया और फिर रोने लगी। एक दुकानदार अंकल ने कहा, मैं शाम को अपनी डिलीवरी के दौरान देखता रहूंगा। कॉलोनी के बच्चे भी साथ हो लिए। सब ब्रूनो को पुकार रहे थे, और ढूंढने में लग गए।

दोपहर तक पैर दुखने लगे। धूप तेज हो गई थी। सब एक पेड़ के नीचे बैठे। सरिता ने घर से पानी की बोतलें लाई थीं। सब चुपचाप पी रहे थे। अर्जुन बोला, पापा, अगर ब्रूनो नहीं मिला तो? राजेश ने उसके कंधे पर हाथ रखा। मिलेगा बेटा। हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।

जब शाम को मिला ब्रूनो।

शाम ढलने लगी। सब मुख्य सड़क के पास वाले बड़े पार्क में पहुंचे। वो पार्क कॉलोनी से काफी दूर था। वहाँ बहुत लोग थे। बच्चे खेल रहे थे, कुछ पतंग उड़ा रहे थे। सिया की आँखें थकी हुई थीं, लेकिन वो अभी भी पुकार रही थी।अचानक एक धीमी आवाज आई – भौं… भौं… सिया रुक गई। ये ब्रूनो की आवाज है! सब दौड़े। पार्क के दूर कोने में, एक बड़े नीम के पेड़ के नीचे, ब्रूनो बैठा था। उसकी पूंछ धीरे-धीरे हिल रही थी। वो थका हुआ लग रहा था। पैर में हल्की चोट थी, लेकिन आँखें वही चमक वाली।

सिया सबसे पहले पहुंची। ब्रूनो! वो उसके गले लगकर रोने लगी। ब्रूनो ने उसके चेहरे को चाटा। जैसे कह रहा हो, मैं आ गया, अब रो मत। राजेश और सरिता की आँखें भर आई। अर्जुन ने ब्रूनो को गोद में उठाया। आस-पास के लोग मुस्कुरा रहे थे। एक अंकल बोले, देखा, मिल गया। भगवान अच्छा करता है।

तस्वीर सांकेतिक- image source canva.

ब्रूनो की घर वापसी।

घर लौटते वक्त ब्रूनो अर्जुन की गोद में था। सिया उसका कॉलर पकड़े चल रही थी। रास्ते में वही पड़ोसी मिले। सब खुश हो गए। गुप्ता आंटी ने मिठाई का डिब्बा थमा दिया। आज खुशी का दिन है, लो सबको बाँट दो।

घर पहुंचकर सरिता ने ब्रूनो को अच्छे से नहलाया। चोट पर दवा लगाई। राजेश ने किचन में जाकर उसका फेवरेट चिकन सूप बनाया। सिया ब्रूनो के पास से हिली ही नहीं। रात को सब साथ बैठे। ब्रूनो सिया के बिस्तर पर था।

राजेश ने धीरे से कहा, आज हमें पता चला कि हम अकेले नहीं हैं। इस कॉलोनी में कितने अच्छे लोग हैं। सरिता बोलीं, और हमारा परिवार कितना मजबूत है। मुश्किल में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ता।

अर्जुन मुस्कुराया, आगे से कभी कॉलर नहीं खोलूंगा।

सिया ने ब्रूनो के कान सहलाते हुए कहा, तुम कभी मत जाना। हम सब तुम्हें बहुत प्यार करते हैं। उस रात घर में फिर से खुशी लौट आई। बाहर ठंड थी, लेकिन अंदर प्यार की गर्मी। ब्रूनो की सांसें नियमित हो गईं। और परिवार को एहसास हुआ कि कभी-कभी कोई खो जाता है ताकि हमें अपने आस-पास की कीमत समझ आए।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कमेंट में बताइए।

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