विनीता की जिंदगी एकदम रूटीन थी। सुबह सात बजे अलार्म बजता, वो आँखें मलते हुए उठती, जल्दी से चाय बनाती, नहाती, हल्का मेकअप करती और इन्हीं सब काम के दौरान फोन निकालकर ऑनलाइन टैक्सी बुक कर लेती। गुरुग्राम का ट्रैफिक तो जैसे उसका दुश्मन नंबर वन था, ऑफिस आने जाने के समय काफी जाम होता है। दिल्ली के फ्लैट से साइबर हब तक का सफर रोज़ का था, और वो अक्सर पूल राइड चुनती थी ताकि थोड़े पैसे बचें और पर्यावरण को भी कुछ मदद मिले।
उसकी उम्र यही कोई 26 साल की थी, इस उम्र में वो एक मिड-साइज़ टेक कंपनी में HR एग्जीक्यूटिव थी। कंपनी का नाम था TechNova Solutions। काम अच्छा था, सैलरी भी ठीक-ठाक ही थी, लेकिन उसकी जिंदगी में कुछ रोमांच की कमी थी। ना कोई बॉयफ्रेंड नहीं, डेट्स नहीं, बस वीकेंड पर नेटफ्लिक्स और दोस्तों के साथ बातचीत, यही उसकी लाइफस्टाइल थी।
एक अलग सुबह शरुआत।
उस दिन सुबह कुछ अलग थी। विनीता ने जल्दबाजी में पूल राइड बुक की। ऐप ने दिखाया कि एक और पैसेंजर भी जॉइन करेगा – नाम विवेक कुमार। ठीक है, कोई बात नहीं, उसने सोचा और घर से निकल गई।
कुछ देर के बाद टैक्सी आई – एक सफेद सेडान। ड्राइवर ने कहा, मैडम, एक और सर को पिक करना है, पाँच मिनट में।
विनीता बैकसीट पर बैठ गई, फोन में ईमेल चेक करने लगी। टैक्सी रुकी, दरवाजा खुला और एक लड़का अंदर आया। लंबा, साफ-सुथरा कुर्ता-जींस पहने, हाथ में लैपटॉप बैग और एक फाइल। चश्मा लगाया हुआ, बाल हल्के उलझे हुए, लेकिन मुस्कान ऐसी कि देखते ही बन रहा था।
हाय, सॉरी अगर लेट हो गया, उसने कहा और सीट पर बैठते हुए विनीता की तरफ मुस्कुराते हुए देखा।
विनीता ने मुस्कुराकर कहा, नो प्रॉब्लम।

सफर की शुरुआत आगे बढ़ी।
विवेक ने सीट बेल्ट बांधी और ड्राइवर से पूछा, भाई साहब साइबर हब कितना टाइम लगेगा?
सर आधा घंटा लगेगा, ट्रैफिक बहुत है। लेकिन आधा घंटा में पहुंच जायेंगे।
विनीता ने, विवेक पर सरसरी नजर डाली। लड़का नर्वस लग रहा था। बार-बार फाइल खोल रहा था, रिज्यूमे देख रहा था। उसने सोचा, शायद कोई मीटिंग में जा रहा है।
फिर अचानक विवेक ने बात शुरू की। आज ट्रैफिक ज्यादा है ना? मैं पहली बार पूल राइड कर रहा हूँ। आमतौर पर खुद ड्राइव करता हूँ, लेकिन आज कार सर्विसिंग पर है।
विनीता हँस पड़ी। मैं तो अक्सर करती हूँ। पैसे बचते हैं और कभी-कभी इंटरेस्टिंग लोग मिल जाते हैं।
इंटरेस्टिंग? जैसे की मैं? विवेक ने मजाक में कहा और आँख मार दी।
विनीता थोड़ी सी चौंकी, लेकिन हँस दी। अरे अभी तो पता नहीं। बताइए तो कौन सा इंटरेस्टिंग फैक्ट आपके पास है?
जब बातों का सिलसिला जारी हुआ।
विवेक ने सोचा और कहा, मुझे कॉफी बेहद पसंद है। एक दिन में पाँच कप पी जाता हूँ। और आप?
मैं चाय वाली हूँ। कॉफी से एलर्जी है मुझे मतलब नींद उड़ जाती है। विनीता ने कहा।बातें शुरू हो गईं। विवेक ने बताया कि वो नोएडा से है, सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, तीन साल एक्सपीरियंस, आज एक कंपनी में इंटरव्यू है, वही देने जा रहा हूँ। विनीता ने ध्यान से सुना, लेकिन कंपनी का नाम नहीं पूछा। वो खुद को प्रोफेशनल रखती थी – ऑफिस की बातें बाहर कभी नहीं करती थी।
ट्रैफिक जाम में टैक्सी रुकी हुई थी। ड्राइवर रेडियो पर पुराने गाने बजा रहा था। “ये लो, ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ बज रहा है,” विवेक ने कहा और गुनगुनाने लगा। उसकी आवाज अच्छी थी।
विनीता हँसते हुए बोली, आप तो सिंगर लगते हो। इंटरव्यू म्यूजिक कंपनी में है क्या?
नहीं-नहीं, टेक कंपनी में। लेकिन हॉबी है गाना। आप क्या करती हैं?
जी मैं HR हूँ एक टेक कंपनी में। विनीता ने बेहद ही सामान्य लहजे में कहा।
ये कैसा संयोग?
विवेक की आँखें थोड़ी चमकीं। वाह, HR तो आप लोगों को हायर करती हैं? कितना पावरफुल जॉब है ये तो।
इसमें पावरफुल जैसा क्या है? अरे बस रिज्यूमे देखती हूँ, इंटरव्यू शेड्यूल करती हूँ। आज भी मेरे पास तीन इंटरव्यू हैं। विनीता ने कहा और अचानक रुक गई। उसे याद आया कि आज सुबह एक कैंडिडेट का नाम विवेक कुमार ही था, लेकिन ऐसे में कई विवेक होते हैं, शायद संयोग हो सकता है।
विवेक ने सिर खुजाया। मजेदार संयोग। मेरा इंटरव्यू भी आज है TechNova Solutions में। सॉफ्टवेयर डेवलपर का।
विनीता की आँखें फैलीं। वो खुद को रोक नहीं पाई और जोर से हँस पड़ी। क्या! TechNova? वो तो मेरी कंपनी है, मैं उसी में जॉब करती हूँ।
विवेक स्तब्ध रह गया। सीरियसली? मतलब आप वहीं HR हैं?
हाँ मैं विनीता शर्मा। आज सुबह मैंने ही आपका इंटरव्यू शेड्यूल किया था। 10 बजे का स्लॉट है।
सच कहो तो विवेक का चेहरा देखने लायक था। पहले तो उसका चेहरा लाल हुआ, फिर हँस पड़ा। ओह नो, मतलब मैं अभी HR मैम के साथ पूल राइड शेयर कर रहा हूँ? ये तो epic fail है मेरी तरफ से.
एपिक फेल क्यों? अच्छा तो हुआ पहले से जान-पहचान हो गई। विनीता ने मजाक में कहा, लेकिन अंदर से उसे मजा आ रहा था। कितने दिनों बाद कोई ऐसा मजेदार पल आया था उसकी जिंदगी में। वो खुद नहीं समझ पा रही थी की ऐसा कैसे हुआ।
हँसी-मजाक भरा सफर, सुहाना।
विवेक ने हाथ जोड़ लिए। मैम प्लीज इंटरव्यू में तो स्ट्रिक्ट मत होना। यहाँ तो मैंने आपको गाना सुना दिया।
गाना तो ठीक था, लेकिन रिज्यूमे में ये स्किल क्यों नहीं लिखा?” विनीता ने थोड़ी टांग खींची।
दोनों हँसते रहे। ट्रैफिक खुला और टैक्सी चल पड़ी। अब बातें थोड़ा और ज्यादा खुल कर होने लगी। विवेक ने बताया कि वो बैंगलोर से अभी दिल्ली शिफ्ट हुआ है, फैमिली नोएडा में है।
विनीता ने भी अपने बारे में बताया कि वो दिल्ली की है, सिंगल चाइल्ड, पेरेंट्स रिटायर्ड है। उसे घूमना पसंद है, लेकिन टाइम नहीं मिलता। एक बार मनाली गई थी, बर्फबारी में फिसलकर गिर पड़ी थी पैर में काफी चोट आया था,विनीता ने हँसते हुए कहा।
“मैं भी गया हूँ, लेकिन मैं तो स्कीइंग करने की कोशिश में गिरा था। डॉक्टर ने कहा हड्डी टूटने वाली थी, विवेक ने जवाब दिया। ये बात सुनकर दोनों की हँसी छूट गई। दोनों की बात सुनकर ड्राइवर भी मुस्कुरा रहा था।
ऑफिस पहुँचकर, जब मिले।
आखिरकार साइबर हब पहुँचे। टैक्सी रुकी।
तो चलिए मैम… उर्फ विनीता जी, विवेक ने कहा और दरवाजा खोला।
विनीता काफी है। और इंटरव्यू में बेस्ट ऑफ लक। स्ट्रिक्ट नहीं हूँ मैं, प्रॉमिस। विनीता ने मुस्कुराते हुए कहा।ऑफिस पहुँचकर विनीता अपनी डेस्क पर गई। उसके दिल में हल्की सी उत्तेजना थी। विवेक 10 बजे आया। रिसेप्शन से कॉल आया। विनीता खुद उसे लेने गई।
वेलकम टू TechNova, मिस्टर विवेक जी , उसने प्रोफेशनल अंदाज में कहा, लेकिन आँखों में थोड़ी शरारत थी उसकी।
विवेक ने भी प्रोफेशनल बनते हुए कहा, थैंक यू मैम। मैं रेडी हूँ इंटरव्यू के लिए।
जब इंटरव्यू का मजेदार मोड़ आया।
इंटरव्यू रूम में पैनल था – टेक्निकल हेड और विनीता। टेक्निकल सवालों में विवेक अच्छा परफॉर्म कर रहा था। लेकिन जब विनीता का टर्न आया, तो उसने पूछा, विवेक जी आप स्ट्रेस कैसे हैंडल करते हैं?
विवेक ने मुस्कुराकर कहा, गाना गाकर। या कभी-कभी पूल राइड में अच्छे लोग मिल जाएँ तो उनसे बात करके।
पैनल वाले कन्फ्यूज हो गए, लेकिन विनीता हँसते-हँसते रह गई। इंटरव्यू खत्म हुआ। विवेक बाहर को निकला।
विनीता ने उसे मैसेज किया – लंच ब्रेक में मिलते है, दोनों साथ में कॉफी पिएंगे। कैंटीन में बहुत अच्छी कॉफी मिलता है।
विवेक का रिप्लाई आया: चाय पिलाओगी तो जरूर। कॉफी से तो मुझे एलर्जी है।

एक नई शुरुआत हो गई !
विनीता मुस्कुराई। उसे पता था, ये सिर्फ शुरुआत है। एक साधारण पूल राइड ने उसकी रूटीन जिंदगी में थोड़ा रोमांच की चिंगारी जला दिया था।
शाम को जब वो घर लौट रही थी, फोन पर विवेक का मैसेज आया: “थैंक्स फॉर द राइड… एंड द इंटरव्यू। कल से अगर जॉइन करूँ तो फिर पूल शेयर करेंगे?”
विनीता ने लिखा: “डिपेंड करता है। पहले ऑफर लेटर तो कमपनी भेजे।
और इस तरह, एक अनजान सफर ने दो अनजान दिलों को जोड़ दिया। अब आगे क्या होगा, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन उस दिन विनीता को लगा कि जिंदगी कभी-कभी सबसे अनएक्सपेक्टेड मोड़ पर सबसे खूबसूरत सरप्राइज भी दे सकती है।
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