Amroha Ahana News: अमरोहा (उत्तर प्रदेश) से एक बेहद ही हैरान करने वाला खबर आया है, यहां मोहल्ला अफगानान की 16 साल की होनहार छात्रा अहाना नहीं रही। वजह बस ये था की वो रोज पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन और मैगी जैसे बाहर के चटपटे खाने की आदि हो गई थीं। घर की सादी दाल-रोटी उन्हें बिलकुल भी पसंद नहीं आता था। डॉक्टरों ने बताया कि इसी फास्ट फूड की वजह से उनकी आंतें कमजोर हो गई थी और उनमें छेद हो गए और पाचन तंत्र पूरी तरह खराब हो गया। आखिर में दिल्ली के एम्स में इलाज के दौरान 22 दिसंबर की रात उसकी सांसें थम गई।
अहाना कौन थी?
TV 9 के एक रिपोर्ट के अनुसार, अहाना हाशमी गर्ल्स इंटर कॉलेज में 11वीं क्लास में पढ़ने वाले छात्रा थीं। उसके पापा मंसूर खान खेती-बाड़ी करके घर चलाते थे, मम्मी सारा खान घर संभालती हैं। घर में उसके अलावा एक भाई और दो बहनें हैं, अहाना सबसे छोटी और सबसे प्यारी थीं। घरवाले बताते हैं कि बचपन से ही उसे बाहर का खाना पसंद था।
चाऊमीन तो जैसे उनका फेवरेट था, साथ में पिज्जा और बर्गर। मना करने पर भी वो जिद करतीं और मंगवा ही लेतीं थी। मामा गुलजार खान उर्फ गुड्डू मीडिया से बातचीत में बताते है की, बहन की बेटी थी, क्या मना करते? लेकिन अब वो भी पछता रहे हैं कि कास थोड़ा सख्ती करते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता, बच्ची आज हमारे साथ होती।
बीमारी कैसे शुरू हुई और मौत तक का सफर
सितंबर-नवंबर में अहाना को अचानक से पेट में तेज दर्द होने लगा। पहले तो घर वाले सोचे की सामान्य है, लेकिन जब बढ़ा तो मुरादाबाद के प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। जांच में खुलासा हुआ कि आंतें आपस में चिपक गई हैं और कई जगह छेद (परफोरेशन) हो गए हैं। ये सुनकर तो जैसे परिवार के होश उड़ गए की आखिर ये कैसे हो गया, खैर कुछ दिन बाद ऑपरेशन हुआ, कुछ दिन ठीक भी रही, घर भी आ गई।
लेकिन कमजोरी नहीं गई। चार दिन पहले फिर हालत बिगड़ी तो दिल्ली एम्स ले गए। वहां डॉक्टरों ने अपने तरफ से काफी मेहनत की, लेकिन हार्ट फेल हो गया और अहाना चली गई। एम्स के डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि ये सब कुछ लंबे समय तक मैदे वाले फास्ट फूड खाने की वजह से हुआ।
फास्ट फूड क्यों बन जाता है जहर? डॉक्टरों की चेतावनी।
दोस्तो, ये पिज्जा-बर्गर, चाऊमीन देखने में कितने लजीज लगते हैं ना? लेकिन अंदर से खोखले होते हैं। इनमें फाइबर नाम की चीज नहीं होती, जो पेट साफ रखती है। ज्यादा तेल, नमक और चीनी से शरीर को नुकसान पहुंचता है। लंबे समय तक खाओ तो कब्ज, सूजन, अल्सर और आंतों में छेद तक हो सकता है। अमरोहा हो या उसके जैसे कोई भी इलाका हो अब हर गली में ठेले और दुकानें लगी हुई हैं, बच्चे स्कूल से लौटते वक्त रुक ही जाते हैं, और खाने लगते है।
घर का खाना ही है असली दवा, क्या करें अब?
अब समय है संभलने का। मां-बाप, बच्चों पर नजर रखे वो क्या खा रहे है, कितना खा रहे है। घर में बने दाल, सब्जी, रोटी, बनाओ और उन्हें खाने के लिए प्रेरित करे। बाहर का खाना हफ्ते में एक बार से ज्यादा न दे, वो बहुत ज्यादा जिद्द कर रहा है तब। बच्चों को प्यार से समझाओ कि स्वाद के चक्कर में सेहत मत खराब करो। स्कूलों में भी हेल्थ की क्लास लगनी चाहिए। अगर लत लग गई है तो धीरे-धीरे कम करो। घर का बना खाना ही ताकत देता है, और बीमारियों से बचाता है।
मोहल्ले में छाया हैं मातम, अब सबक लेने का वक्त है।
अहाना की मौत से पूरा मोहल्ला सदमे में है। पड़ोसियों का कहना है की , अरे यार, आजकल के बच्चे सब ऐसे ही हैं, बिलकुल कुछ सुनने को तैयार ही नहीं है, जो चीज खाने की जिद्द पकड़ लेते है तो फिर देने के बाद ही शांत होते है। लेकिन अब तो सबको सावधान होना पड़ेगा।
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